सहकारिता विभाग में जांच पर उठे सवाल: 7 दिन की जांच 4 महीने बाद भी अधूरी, कार्रवाई नहीं होने से बढ़ा विवाद

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शैक्षणिक प्रमाण पत्र जांच मामले में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल, शिकायतकर्ता ने उठाई पारदर्शिता की मांग

छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित से जुड़े एक संवेदनशील मामले में जांच प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला जितेन्द्र देवांगन पिता सत्यनारायण देवांगन के शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य अर्हता प्रमाण पत्रों की जांच से जुड़ा है, जिसमें शिकायत प्राप्त होने के बाद भी निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर अब विभागीय कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यालय सहकार भवन में जितेन्द्र देवांगन के शैक्षणिक दस्तावेजों एवं अन्य पात्रताओं को लेकर शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए दिनांक 24 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के प्रबंध संचालक द्वारा संबंधित अधिकारी को लिखित निर्देश जारी किया गया था। निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि मामले की जांच कर 7 दिवस के भीतर तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।

हालांकि, शिकायत के लगभग चार महीने बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं होने और किसी प्रकार की स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आने से अब पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं।

शिकायतकर्ता ने पूछे कई अहम सवाल

मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने विभागीय अधिकारियों से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब 7 दिनों के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, तो आखिर जांच में इतनी देरी क्यों हुई?

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक जांच में क्या-क्या कार्रवाई की गई, किन दस्तावेजों का परीक्षण किया गया और जांच में क्या तथ्य सामने आए हैं?

शिकायतकर्ता ने संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि जांच में देरी कहीं आरोपी को बचाने का प्रयास तो नहीं है। उनका कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही होती, तो अब तक तथ्य सार्वजनिक हो जाने चाहिए थे।

उच्च अधिकारियों के निर्देशों के पालन पर भी उठे सवाल

मामले में एक और बड़ा मुद्दा यह सामने आया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा उच्च अधिकारियों के निर्देशों का समय पर पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक जिम्मेदार लोकसेवक द्वारा निर्धारित समयसीमा में जांच पूरी नहीं करना प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की देरी से आम नागरिकों के मन में यह शंका उत्पन्न होती है कि कहीं विभागीय स्तर पर मामले को दबाने या प्रभावित करने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।

दोषी पाए जाने पर क्या होगी कार्रवाई?

शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में जितेन्द्र देवांगन दोषी पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए जिन्होंने समयसीमा के भीतर जांच पूरी नहीं की।

विभागीय चुप्पी से बढ़ रही चर्चाएं

पूरे मामले में अब तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में जांच प्रक्रिया को कितनी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाता है और शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब कब तक देता है।

GN24News इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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